मुख्य सचिव की कलेक्टरों को दोटूक चेतावनी- 7 दिन में सुधारें प्रदर्शन, समयसीमा खत्म होने में महज 9 दिन शेष
भोपाल- मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना को लेकर शासन की सख्ती भी जमीनी स्तर पर असर दिखाने में नाकाम नजर आ रही है। हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई, निलंबन और बर्खास्तगी के बावजूद योजना के तहत 22 दिन बीतने पर भी एक भी रजिस्ट्री दर्ज नहीं हो सकी है। इस लचर प्रगति पर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी कलेक्टरों और राजस्व अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई और सात दिन के भीतर प्रदर्शन सुधारने का अल्टीमेटम दिया।
3,430 नोटिस, 129 निलंबित और 29 बर्खास्त
स्वामित्व योजना में लापरवाही और काम की धीमी रफ्तार पर प्रदेशभर में अब तक 3,430 अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। वहीं, 129 पटवारियों को निलंबित और 29 को बर्खास्त किया गया है। इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद रजिस्ट्री की शुरुआत नहीं होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
मुख्य सचिव की दोटूक- जिले पटवारी चला रहे हैं या अधिकारी?
समीक्षा बैठक में योजना की खराब प्रगति पर नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव ने अधिकारियों से सवाल किया, “जिला या संभाग पटवारी चला रहे हैं या आप लोग?” उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि पटवारियों की मांगें माने जाने के बाद अब रजिस्ट्री की प्रक्रिया तत्काल शुरू कराई जाए। अधिकारियों को मैदानी स्तर पर सक्रिय होकर काम पूरा कराने की जिम्मेदारी निभाने को कहा गया।
कार्रवाई के विरोध में पटवारी हड़ताल पर
एक ओर शासन योजना में तेजी लाने के लिए लगातार सख्ती बरत रहा है, तो दूसरी ओर कार्रवाई के विरोध में प्रदेशभर के पटवारी सामूहिक अवकाश और हड़ताल पर चले गए हैं। पटवारी संघ का कहना है कि संगठन की ओर से काम शुरू करने के स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं। ऐसे में शासन और पटवारी संघ के बीच जारी गतिरोध का सीधा असर योजना की प्रगति पर पड़ता दिखाई दे रहा है।
नौ दिन शेष, अब कलेक्टरों के प्रदर्शन की होगी परीक्षा
स्वामित्व योजना की निर्धारित समयसीमा समाप्त होने में महज नौ दिन शेष बताए जा रहे हैं। मुख्य सचिव ने सात दिन के भीतर प्रदर्शन सुधारने की चेतावनी देते हुए साफ संकेत दिए हैं कि निर्धारित अवधि में परिणाम नहीं आए तो संबंधित जिलों के कलेक्टरों और अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा कर उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।
बड़ा सवाल: जब हजारों नोटिस जारी हो चुके हैं, सैकड़ों नहीं बल्कि दर्जनों पटवारी निलंबित और बर्खास्त किए जा चुके हैं, तो फिर रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू क्यों नहीं हो सकी? अब देखना होगा कि शासन का सात दिन का अल्टीमेटम जमीनी स्तर पर असर दिखाता है या स्वामित्व योजना की रफ्तार प्रशासनिक दावों तक ही सीमित रह जाती है।