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जिला पंचायत सीईओ की समीक्षा बैठक के बाद हरकत में आया मैदानी अमला, गांव-गांव पहुंच रहे सेक्टर सुपरवाइजर

जनलोक टाईम्स से रामेश्वर त्रिपाठी की रिपोर्ट

कटनी- जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर की समीक्षा बैठक के अगले ही दिन प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में तेजी लाने के प्रयास मैदानी स्तर पर दिखाई देने लगे हैं। लंबित आवासों को समय-सीमा में पूर्ण कराने के उद्देश्य से सेक्टर सुपरवाइजर गांव-गांव पहुंचकर हितग्राहियों से सीधा संवाद कर रहे हैं। इस दौरान आवास निर्माण की स्थिति का जायजा लेने के साथ हितग्राहियों की समस्याएं सुनकर उनके निराकरण के लिए आवश्यक पहल की जा रही है।

अधूरे आवासों की स्थिति का ले रहे जायजा

समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद मैदानी अमले ने आवास पूर्णता पर फोकस बढ़ाया है। सेक्टर सुपरवाइजर हितग्राहियों के घर पहुंचकर निर्माण कार्य की प्रगति देख रहे हैं और यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि मकान पूरा करने में किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हितग्राहियों की कठिनाइयों को समझते हुए उनके समाधान के लिए जरूरी कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है, ताकि निर्माण कार्य में आने वाली बाधाएं दूर हों और आवास जल्द पूरे किए जा सकें।

हितग्राहियों को समझाइश, समय पर आवास पूरा करने पर जोर

मैदानी भ्रमण के दौरान हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के उद्देश्य और आवास निर्माण पूर्ण करने की आवश्यकता के संबंध में समझाइश दी जा रही है। सेक्टर सुपरवाइजर व्यक्तिगत रूप से चर्चा कर हितग्राहियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। साथ ही, उनकी समस्याओं को संबंधित स्तर पर पहुंचाकर समाधान की दिशा में पहल की जा रही है।

समीक्षा बैठक के निर्देशों को धरातल पर उतारने की कवायद

जिला पंचायत सीईओ की समीक्षा बैठक के बाद अधिकारियों और मैदानी अमले की सक्रियता बढ़ने से योजना की प्रगति पर निगरानी मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन का जोर केवल समीक्षा तक सीमित रहने के बजाय निर्देशों को जमीन पर लागू करने और पात्र हितग्राहियों तक योजना का लाभ पहुंचाने पर है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पात्र परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए लंबित आवासों का निर्माण पूरा कराना, हितग्राहियों की समस्याओं का निराकरण करना और नियमित मैदानी निगरानी बनाए रखना महत्वपूर्ण है। गांव-गांव पहुंच रहे सेक्टर सुपरवाइजरों के जरिए इसी दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

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