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1100 महिलाओं-बालिकाओं के गरबा से गूंज उठी भोपाल पुलिस लाइन, डीजीपी की मौजूदगी में महोत्सव का भव्य समापन

जनलोक टाईम्स से रामेश्वर त्रिपाठी की रिपोर्ट

पांच वर्षों से पुलिस परिवारों में सांस्कृतिक एकता और सौहार्द का प्रतीक बना आयोजन, डीजीपी ने प्रतिभागियों को किया पुरस्कृत

वरिष्ठ और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों ने भी परिवार सहित लिया हिस्सा, पुलिस परिजनों ने पहल के लिए जताया आभार

भोपाल- पुलिस की वर्दी के पीछे छिपे पारिवारिक उल्लास, सांस्कृतिक रंगों और आपसी अपनत्व की खूबसूरत तस्वीर रविवार को भोपाल की पुलिस लाइन, नेहरू नगर में देखने को मिली। मां अम्बे की आराधना, पारंपरिक गरबा की थाप और 1100 से अधिक महिलाओं-बालिकाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों के बीच दो दिवसीय मध्यप्रदेश पुलिस गरबा महोत्सव का उत्साहपूर्ण समापन हुआ। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा की उपस्थिति में आयोजित इस महोत्सव ने पुलिस परिवारों के बीच एकता, सहयोग और सौहार्द का संदेश दिया।

मां अम्बे की आरती के साथ शुरू हुआ दूसरे दिन का उत्सव

महोत्सव के दूसरे दिन पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने मां अम्बे की आरती कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद जिला पुलिस बल भोपाल सहित सातवीं, 23वीं और 25वीं वाहिनी के पुलिस परिवारों की महिलाओं एवं बालिकाओं ने धार्मिक और फिल्मी धुनों पर आकर्षक गरबा प्रस्तुतियां दीं। रंग-बिरंगे परिधानों में सजी प्रतिभागियों की सामूहिक प्रस्तुतियों ने माहौल को भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना दिया। उपस्थित पुलिस परिवारजनों और दर्शकों ने तालियों के साथ प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया।

कार्यक्रम में पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी भी अपने परिवारों सहित शामिल हुए। सभी ने पुलिस परिवारों के साथ सांस्कृतिक उत्सव का आनंद लिया और इस पहल की सराहना की।

डीजीपी ने प्रतिभागियों को किया पुरस्कृत

समारोह के समापन पर डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा ने प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया और महोत्सव की सफलता पर बधाई दी। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाली कल्याण शाखा तथा संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की सराहना की।

महोत्सव में शामिल पुलिस परिवारजनों ने इस आयोजन के लिए पुलिस महानिदेशक के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि इस तरह के कार्यक्रम पुलिस परिवारों को एक-दूसरे के करीब लाने, प्रतिभाओं को मंच देने और व्यस्त दिनचर्या के बीच साथ मिलकर खुशियां मनाने का अवसर प्रदान करते हैं।

प्रशिक्षण शिविरों से तैयार हुईं सामूहिक प्रस्तुतियां

महोत्सव को आकर्षक और व्यवस्थित बनाने के लिए आयोजन से पहले पुलिस लाइन तथा संबंधित वाहिनियों में गरबा प्रशिक्षण शिविर लगाए गए थे। इनमें महिलाओं और बालिकाओं ने नियमित अभ्यास कर सामूहिक प्रस्तुतियों की तैयारी की। समापन अवसर पर प्रतिभागियों के साथ आयोजन में सहयोग देने वाले पुलिस परिवारजनों को भी प्रोत्साहित किया गया।

वर्ष 2022 में हुई थी शुरुआत, अब वार्षिक परंपरा बना महोत्सव

मध्यप्रदेश पुलिस गरबा महोत्सव की शुरुआत वर्ष 2022 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर सक्सेना की धर्मपत्नी श्रीमती प्रियंवदा सक्सेना की परिकल्पना से हुई थी। उद्देश्य था पुलिस परिवारों को सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से जोड़ना और उनके बीच आपसी सहयोग तथा सामंजस्य को बढ़ावा देना। पांच वर्षों से जारी यह पहल अब पुलिस परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण वार्षिक आयोजन बन चुकी है।

ड्यूटी की व्यस्तता के बीच परिवारों को मिला खुशियों का मंच

पुलिस अधिकारी और कर्मचारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और जनसेवा की जिम्मेदारियों के चलते त्योहारों के दौरान भी ड्यूटी निभाते हैं। ऐसे में पुलिस परिवारों को सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने, अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और साथ समय बिताने का अवसर देना इस महोत्सव की खास उपलब्धि है।

मध्यप्रदेश पुलिस गरबा महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पुलिस बल और उनके परिवारों के कल्याण, सम्मान तथा भावनात्मक जुड़ाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। आयोजन ने यह संदेश दिया कि पुलिस की मजबूती केवल वर्दीधारी जवानों के समर्पण में ही नहीं, बल्कि उनके पीछे खड़े परिवारों के सहयोग, विश्वास और एकजुटता में भी निहित है।

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