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कान्हा में नहीं थम रहा बाघों की मौत का सिलसिला, उपचार के दौरान एक और शावक ने तोड़ा दम, 2026 में मृत बाघों की संख्या एक दर्जन के पार

जनलोक टाईम्स से रामेश्वर त्रिपाठी की रिपोर्ट

मंडला- कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार, 18 अक्टूबर को चिकित्सकीय देखरेख में एक और मादा बाघ शावक की मौत हो गई। इसके साथ ही वर्ष 2026 में मृत बाघों की संख्या एक दर्जन से अधिक हो गई है। लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

जानकारी के अनुसार, कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में मादा बाघ शावक का उपचार चल रहा था। उसे 8 अक्टूबर को वन विकास निगम के मोहगांव प्रोजेक्ट क्षेत्र के ग्राम अरौली में आबादी के बीच पहुंचने और एक महिला को घायल करने की घटना के बाद रेस्क्यू किया गया था। रेस्क्यू के समय शावक की शारीरिक स्थिति कमजोर थी। वन विभाग ने उसकी जान बचाने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार शुरू कराया था, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

10 दिन तक चला उपचार, फिर भी नहीं बची जान

वन विभाग के अनुसार, मादा बाघ शावक रेस्क्यू के समय अकेली और कमजोर अवस्था में मिली थी। वन्यजीव उपचार केंद्र में उसकी लगातार निगरानी की जा रही थी। करीब 10 दिन तक चले उपचार के बाद 18 अक्टूबर को उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की मानक संचालन प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम और शवदाह की कार्रवाई की गई।

फोरेंसिक जांच के बाद सामने आएगा मौत का कारण

मादा बाघ शावक की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम के दौरान आवश्यक अंगों और जैविक नमूनों को फोरेंसिक एवं पैथोलॉजिकल जांच के लिए जबलपुर स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
पोस्टमार्टम कान्हा टाइगर रिजर्व के वन्यजीव चिकित्सा अधिकारी, उप संचालक पशुपालन मंडला और बैहर के पशु चिकित्सक की संयुक्त टीम ने किया।

इस दौरान कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रवीन्द्र मणि त्रिपाठी, हालोन के सहायक संचालक, मुक्की परिक्षेत्र अधिकारी, एनटीसीए प्रतिनिधि रंजीत सत्रुसल्य, तहसीलदार, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

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