मध्यप्रदेश

शहडोल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बांटे 22.85 करोड़ रुपये के तेंदूपत्ता बोनस, 326 करोड़ के विकास कार्यों की दी सौगात

जनलोक टाईम्स से रामेश्वर प्रसाद त्रिपाठी की रिपोर्ट

बाणगंगा मेला मैदान में आयोजित हुआ तेंदूपत्ता संग्राहक बोनस वितरण एवं प्रशिक्षण-सह-जागरूकता कार्यक्रम, सिंगल क्लिक से हितग्राहियों के खातों में पहुंचाई राशि

शहडोल- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को शहडोल के बाणगंगा मेला मैदान में आयोजित तेंदूपत्ता संग्राहकों के बोनस वितरण एवं प्रशिक्षण-सह-जागरूकता कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तेंदूपत्ता संग्राहकों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 22.85 करोड़ रुपये की बोनस राशि वितरित की गई। इस पहल से छह डिवीजन और पांच जिलों के 8 लाख 66 हजार से अधिक तेंदूपत्ता हितग्राहियों को लाभ पहुंचाया गया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वन विभाग कार्यालय का उद्घाटन करने के साथ ही विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण भी किया। इन कार्यों की कुल लागत 326 करोड़ रुपये बताई गई। कार्यक्रम के माध्यम से वन उपज संग्राहकों के हितों के संरक्षण, आर्थिक सशक्तीकरण और क्षेत्र के विकास को गति देने का संदेश दिया गया।

‘न बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपया’

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “न बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपया।” उन्होंने कहा कि सरकार सबके हक को उन तक पहुंचाने का काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ मिले और विकास कार्यों के माध्यम से प्रदेश की प्रगति सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार के माध्यम से साढ़े चार सौ करोड़ रुपये के कार्यों का लोकार्पण किया गया है। हालांकि, कार्यक्रम से संबंधित उपलब्ध विवरण में 326 करोड़ रुपये के कार्यों के भूमिपूजन एवं लोकार्पण का उल्लेख है।

जनप्रतिनिधियों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम के मंच पर सांसद हिमाद्री सिंह, विधायक मनीषा सिंह, शरद कोल, जय सिंह मरावी, रामलाल रोतेल और जिला अध्यक्ष अमिता चपरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में तेंदूपत्ता संग्राहकों के हितों से जुड़े विषयों के साथ विकास कार्यों और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं पर जोर दिया गया।

तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े हितग्राहियों को बोनस वितरण के जरिए आर्थिक लाभ पहुंचाने की इस पहल को वन आधारित आजीविका से जुड़े परिवारों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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