प्रशासनमध्यप्रदेश

बरही में ‘हाईटेक’ हुआ रेत का अवैध खेल, अधिकारियों की गाड़ी निकलते ही बजती है फोन की घंटी, तहसील और थाने के बाहर तैनात रहते हैं माफिया के ‘गुर्गे’

जनलोक टाईम्स से सोनू त्रिपाठी की रिपोर्ट

रेकी ऐसी कि प्रशासन के पहुंचने से पहले ही खाली हो जाता है खनन स्थल

कटनी- जिले के बरही थाना क्षेत्र में चल रहे अवैध रेत खनन और परिवहन को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। बरही में रेत माफिया सिर्फ कानून को चुनौती ही नहीं दे रहा, बल्कि प्रशासनिक तंत्र से दो कदम आगे रहकर पूरा नेटवर्क चला रहा है। कार्रवाई से बचने के लिए माफिया ने बाकायदा ‘रेकी और निगरानी’ का चाक-चौबंद तंत्र खड़ा कर रखा है।

सरकारी दफ्तरों पर माफिया की कड़ी नजर

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, खनन माफिया ने बरही थाना, तहसील कार्यालय और एसडीएम दफ्तर के बाहर अपने गुर्गों को तैनात कर रखा है। अधिकारी कब कार्यालय से बाहर निकल रहे हैं, उनकी गाड़ी किस दिशा में मुड़ रही है—इस बात की पल-पल की लोकेशन तुरंत कंट्रोल रूम (माफिया के आकाओं) तक पहुंचा दी जाती है।

अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही सन्नाटा

इस नेटवर्क का नतीजा यह होता है कि जब तक पुलिस या राजस्व की टीम किसी संभावित ठिकाने पर पहुंचती है, उससे काफी पहले ही खनन स्थल से मजदूर, पोकलेन/जेसीबी मशीनें और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां रफूचक्कर हो चुकी होती हैं। टीम को मौके पर सिर्फ खाली घाट और गाड़ियों के पहियों के निशान ही मिलते हैं।

प्रशासन के लिए बनी बड़ी चुनौती

अधिकारियों की हर हलचल पर पैनी नजर रखे जाने के इस नए तरीके ने प्रशासनिक कार्रवाई की पोल खोल कर रख दी है। अब देखना यह है कि प्रशासन माफिया के इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए क्या रणनीति अपनाता है, या फिर अधिकारियों की आंखों के सामने यह ‘डिजिटल रेकी’ का खेल यूं ही जारी रहेगा।

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