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ढीमरखेड़ा में 1 सितंबर को सवर्ण समाज की महाबैठक, आर्थिक आधार पर आरक्षण को लेकर निर्णायक हुंकार जंतर-मंतर की तर्ज पर उठेगी आवाज, ज्ञापन के साथ अनशन का ऐलान, ‘जाति नहीं, आर्थिक आधार ही हो आरक्षण का अधिकार’

जनलोक टाईम्स से रामेश्वर त्रिपाठी की रिपोर्ट

ढीमरखेड़ा- दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर की तर्ज पर अब ढीमरखेड़ा में भी सवर्ण समाज अपनी मांगों को लेकर निर्णायक हुंकार भरने जा रहा है। 1 सितंबर को ढीमरखेड़ा में सवर्ण समाज की विशाल महाबैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

आंदोलन के माध्यम से सवर्ण समाज अपनी एकजुटता और सामाजिक शक्ति का परिचय देते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञापन के जरिए आर्थिक आधार पर आरक्षण सहित समाज की मांगों को प्रभावी ढंग से रखा जाएगा। साथ ही मांगों के समर्थन में अनशन किए जाने का भी ऐलान किया जाएगा।

कार्यक्रम के संयोजकों ने बताया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। महाबैठक में सवर्ण समाज के प्रबुद्धजन, सामाजिक संगठन और बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल होंगे।

इस दौरान पूरा क्षेत्र नारों से गूंजेगा—

“जाति नहीं, आर्थिक आधार—यही हो आरक्षण का अधिकार!”
“सवर्ण समाज की एक ही पुकार—आर्थिक आधार पर आरक्षण इस बार!”

आयोजकों ने समाज के सभी वर्गों से 1 सितंबर को अधिक से अधिक संख्या में ढीमरखेड़ा पहुंचने की अपील की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि एकजुटता, सम्मान और अधिकारों की आवाज को मजबूत करने का अभियान है।

संदेश साफ—शांतिपूर्ण आंदोलन से बुलंद होगी अधिकारों की आवाज

सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि समय आ गया है जब समाज एक मंच पर आकर अपनी बात मजबूती से रखे। 1 सितंबर की महाबैठक को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आंदोलनकारियों का स्पष्ट संदेश है कि आरक्षण का आधार जाति नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिति होनी चाहिए।

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