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आम के बगीचे ने बदली आशा की जिंदगी, अब हर महीने 5 से 8 हजार की अतिरिक्त आमदनी, वीबी-जी राम जी योजना बनी आजीविका का मजबूत सहारा

जनलोक टाईम्स से रामेश्वर त्रिपाठी की रिपोर्ट

कटनी- जिले के विकासखंड बड़वारा की ग्राम पंचायत विलायतकला निवासी आशा बाई के लिए वीबी-जी राम जी योजना आजीविका और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन गई है। कभी रोजगार और आमदनी के सीमित साधनों पर निर्भर आशा बाई ने नंदन फलोद्यान योजना के तहत आम के पौधे लगाए, जो आज बड़े होकर फलदार वृक्षों का रूप ले चुके हैं। अब इन्हीं पेड़ों से उन्हें हर माह लगभग 5 हजार से 8 हजार रुपए तक की आमदनी हो रही है।

आशा बाई बताती हैं कि योजना के तहत कार्य स्वीकृत होने के दौरान उन्हें रोजगार मिला और अब फलदार वृक्षों से नियमित आय का स्रोत तैयार हो गया है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और जीवन में खुशहाली बढ़ी है। वे कहती हैं कि हरे-भरे पेड़-पौधे पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहे हैं, वहीं आमदनी होने से परिवार के दैनिक खर्चों को पूरा करने में भी काफी मदद मिल रही है।

1.60 लाख रुपए की लागत से स्वीकृत हुआ था फलोद्यान

जनपद पंचायत बड़वारा की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री प्रभा तेकाम ने बताया कि आशा बाई के जीवन में इस योजना के माध्यम से उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा अजीत सिंह ने बताया कि जुलाई 2021 में 1 लाख 60 हजार रुपए की लागत से नंदन फलोद्यान योजना स्वीकृत की गई थी। योजना के अंतर्गत आशा बाई के खेत में आम के पौधे लगाए गए। मई 2026 में कार्य पूर्ण हो चुका है और अब फलदार वृक्ष उनके लिए नियमित आय का साधन बन गए हैं।

मेहनत और जज्बे से बनीं प्रेरणा

विलायतकला की आशा बाई ने अपनी मेहनत, लगन और आगे बढ़ने के जज्बे से यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो छोटा सा प्रयास भी भविष्य में बड़े बदलाव का आधार बन सकता है। उन्होंने नंदन फलोद्यान को केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि मेहनत और देखभाल से उसे आय के स्थायी स्रोत में बदल दिया।

आज आशा बाई ग्रामीण महिलाओं और अन्य परिवारों के लिए आत्मनिर्भरता और मेहनत की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और मेहनत का जज्बा जीवन में आर्थिक बदलाव और खुशहाली ला सकता है।

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