मध्यप्रदेश

उमरियापान पंचायत में विकास या विनाश? 80–90 लाख के कथित घोटाले की जांच पर उपयंत्री की मिलीभगत के आरोप, भुगतान की पड़ताल अधूरी जनपद सीईओ का पत्र भी बेअसर, कार्रवाई के इंतजार में ग्रामीण

जनलोक टाईम्स से सोनू त्रिपाठी की रिपोर्ट

कटनी/उमरियापान- ढीमरखेड़ा जनपद की ग्राम पंचायत उमरियापान में विकास कार्यों और स्वच्छता मद में बीते करीब सात महीनों के दौरान हुए कथित 80 से 90 लाख रुपये के भुगतान अब सवालों के घेरे में हैं। ग्रामीणों ने पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि जिन कार्यों के नाम पर राशि का भुगतान किया गया, उनमें कई कार्य अधूरे हैं, कुछ की गुणवत्ता संदिग्ध है और कुछ कार्यों के वास्तविक स्वरूप को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत के बावजूद मामले की जांच अब तक पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।

ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक पंचायत के बैंक खातों से नए भुगतान पर रोक लगाई जाए और पूरे वित्तीय लेनदेन का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष ऑडिट कराया जाए।

सफाई मद में भुगतान, फिर भी गंदगी का अंबार

शिकायत में न्यू बस स्टैंड सहित पंचायत क्षेत्र में सफाई कार्यों के नाम पर हुए भुगतान को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सफाई पर बड़ी राशि खर्च की गई है तो सार्वजनिक स्थानों, गलियों और नालियों में गंदगी की स्थिति क्यों बनी हुई है। शिकायतकर्ताओं ने सफाई मद के भुगतान का मौके पर भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।

रंगमंच निर्माण की गुणवत्ता भी जांच के घेरे में

वार्ड क्रमांक 09, 05, 16 और 20 में बनाए गए रंगमंच को लेकर भी ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज कराई है। आरोप है कि स्वीकृत राशि की तुलना में मौके पर हुआ निर्माण संतोषजनक नहीं है। ग्रामीणों ने दोनों कार्यों का तकनीकी परीक्षण कराकर स्वीकृत लागत, वास्तविक निर्माण और भुगतान का मिलान कराने की मांग की है।

अधूरी सीसी रोड और मशीनों से काम कराने का आरोप

पंचायत में कराए गए सीसी रोड निर्माण भी शिकायत के दायरे में हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ सड़कें अधूरी अथवा गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। वहीं मजदूरों से कराए जाने वाले कार्यों में मशीनों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने मस्टर रोल, मजदूरी भुगतान, मशीनरी के उपयोग और मौके पर हुए निर्माण का आपस में मिलान कराने की मांग की है।

श्मशान घाट से नल-जल योजना तक उठे सवाल

विरखा श्मशान घाट में टीन शेड निर्माण, नल-जल योजना और सफाई कार्यों को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ कार्य मौके पर अधूरे दिखाई देते हैं, जबकि उनके भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र और मूल्यांकन रिपोर्ट की भी जांच की मांग की गई है।

हाट बाजार के सीसीकरण पर भी सवाल

हाट बाजार क्षेत्र में कराए गए सीसीकरण की गुणवत्ता को लेकर भी ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि पूर्व में किसी स्तर पर अनियमितता सामने आई थी तो उसके बाद क्या कार्रवाई हुई, इसकी भी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

पहले से बनी सड़क पर दोबारा निर्माण का आरोप

शिकायत में सरपंच के घर के सामने पहले से बनी सीसी रोड के ऊपर नई सड़क बनाए जाने का गंभीर आरोप भी लगाया गया है। हालांकि आरोप की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन यदि सरकारी राशि से बिना आवश्यकता दोबारा निर्माण कराया गया है तो इसकी जिम्मेदारी तय करने की मांग ग्रामीणों ने की है।

पंचों को भुगतान की जानकारी नहीं होने का आरोप

ग्रामीणों ने पंचायत की वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पंचायत से हुए कुछ भुगतानों और राशि निकासी की जानकारी निर्वाचित पंचों तक को नहीं दी गई। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो पंचायत की निर्णय प्रक्रिया और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

बिल-वाउचर से बैंक खाते तक हो पूरा ऑडिट

ग्रामीणों ने मांग की है कि पिछले महीनों के सभी भुगतान, बिल-वाउचर, मस्टर रोल, तकनीकी स्वीकृति, मूल्यांकन रिपोर्ट, कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र और बैंक लेनदेन की बारीकी से जांच की जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक पंचायत खाते को फ्रीज कर नए भुगतान पर रोक लगाने की मांग की गई है। अब सवाल यह है कि शिकायतों के बाद जांच कब पूरी होगी और पंचायत में हुए कथित भुगतानों का वास्तविकता से कितना मेल है? ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर है।

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