भोपाल- मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार नशे के खिलाफ अभियान चलाने और प्रदेश को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने की बात कह रहे हैं। सरकार की ओर से नशे के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर प्रदेश के कई ग्रामीण और शहरी इलाकों में शराब की अवैध पैकारी को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। गांव से लेकर गली-मोहल्लों तक शराब की कथित अवैध बिक्री पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाने से सरकारी दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि कई स्थानों पर अधिकृत शराब दुकानों के अलावा छोटे-छोटे ठिकानों से शराब की बिक्री की जा रही है। इससे न केवल शराब की आसान उपलब्धता बढ़ रही है, बल्कि आबकारी नियमों के पालन और अवैध बिक्री पर निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
आबकारी विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल
अवैध शराब की बिक्री और पैकारी पर कार्रवाई करना आबकारी विभाग की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। इसके बावजूद यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय तक अवैध बिक्री की शिकायतें बनी रहती हैं तो स्थानीय स्तर पर निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों का कहना है कि केवल छिटपुट कार्रवाई के बजाय अवैध शराब के स्रोत, सप्लाई नेटवर्क और पैकारी के ठिकानों पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।
नशे से होने वाले नुकसान को लेकर चिंता
शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान को लेकर सरकार लगातार चिंता जाहिर करती रही है। हाल के दिनों में जहरीली या अवैध शराब से जुड़ी घटनाओं में लोगों की मौत की खबरों ने भी अवैध शराब के कारोबार को लेकर चिंता बढ़ाई है। ऐसे मामलों के बाद अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर सख्ती की जरूरत और अधिक महसूस की जाती है।
दावे और जमीन की हकीकत में अंतर?
एक ओर सरकार नशे के खिलाफ सख्त अभियान की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर यदि गांव-गांव और गली-मोहल्लों में शराब की अवैध पैकारी की शिकायतें सामने आती हैं तो यह प्रशासन और आबकारी विभाग के लिए गंभीर चुनौती है। सवाल यह है कि नशामुक्ति के सरकारी संकल्प को जमीन पर उतारने के लिए अवैध शराब के कारोबार पर कितनी प्रभावी और निरंतर कार्रवाई हो रही है।
अब जरूरत केवल अभियान और जागरूकता तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि अवैध शराब की सप्लाई चेन और पैकारी के ठिकानों पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने की है।