15 दिन पहले शांति समिति की बैठक में उठाया गया था लटकते तार का मुद्दा, JE ने तार ऊंचा कराने का दिया था आश्वासन,
जबलपुर/मझौली- जबलपुर जिले के मझौली में महाकाली/दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान हुए भीषण हाईटेंशन लाइन हादसे के मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसे में तीन लोगों की मौत और 10 से अधिक लोगों के झुलसने के बाद सिहोरा-मझौली रोड पर धरना-प्रदर्शन किया गया। इसके बाद बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) समेत अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है। घटना के बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, बुधवार 21 अक्टूबर 2026 की देर रात करीब 1 बजे सिविल लाइन पाथ से प्रतिमा विसर्जन का जुलूस नारेली तालाब की ओर जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में कम ऊंचाई पर लटक रही 11 केवी हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में झांकी का लोहे का ढांचा (ट्रस) आ गया। इससे पूरे ढांचे में करंट फैल गया और बिजली का तार टूटकर ट्रैक्टर-ट्रॉली पर गिर गया। अचानक हुए इस हादसे से जुलूस में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग करंट की चपेट में आ गए।
दो युवकों की मौके पर मौत, तीसरे ने इलाज के दौरान तोड़ा दम
हादसे में विकास राजपूत (22) और प्रिंस चौहान (23) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। घटना में 10 से अधिक लोग झुलस गए, जिन्हें उपचार के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। हादसे ने धार्मिक उत्सव की खुशियों को मातम में बदल दिया।
15 दिन पहले बैठक में उठा था लटकते तार का मुद्दा
इस हादसे में बिजली विभाग की कथित लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और आयोजन समिति के सदस्यों के अनुसार, घटना से करीब 15 दिन पहले पुलिस, प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में प्रतिमा विसर्जन मार्ग पर कम ऊंचाई पर लटक रही हाईटेंशन लाइन का मुद्दा उठाया गया था।
बताया गया कि उस दौरान बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर ने तार को ऊंचा करवाने का आश्वासन दिया था। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किया गया। लोगों का कहना है कि यदि शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती, तो इस दर्दनाक हादसे को टाला जा सकता था।
धरने के बाद कार्रवाई, लापरवाही की जांच शुरू
तीन लोगों की मौत से आक्रोशित लोगों ने सिहोरा-मझौली रोड पर धरना देकर जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इसके बाद मझौली थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर बिजली विभाग के संबंधित जूनियर इंजीनियर और अन्य जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस अब हादसे के कारणों, बिजली लाइन की ऊंचाई और शिकायत के बावजूद सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाने के आरोपों की जांच कर रही है।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर धार्मिक आयोजनों के दौरान बिजली लाइनों की सुरक्षा, प्रशासनिक समन्वय और समय रहते शिकायतों का निराकरण करने की जरूरत को उजागर कर दिया है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि हादसे के लिए किन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है।