भोपाल- मध्यप्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को अब अपनी शिक्षक पात्रता साबित करने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से गुजरना होगा। कर्मचारी चयन मंडल ने परीक्षा की तारीख घोषित कर दी है। परीक्षा 12 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी, जबकि ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 21 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक चलेगी। आवेदन में संशोधन की सुविधा 9 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी।
प्रदेश में परीक्षा के लिए 11 शहरों में ऑनलाइन परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। परीक्षार्थी भोपाल, इंदौर, जबलपुर, खंडवा, रीवा, सीधी, नीमच, रतलाम, सागर, सतना और उज्जैन में से किसी एक केंद्र का चयन कर सकेंगे।
प्राथमिक शिक्षकों के लिए 150 सवाल, 150 अंक
प्राथमिक शिक्षकों की परीक्षा में कुल 150 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा। प्रश्न बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र, भाषा-1, भाषा-2, गणित और पर्यावरण अध्ययन से होंगे। प्रत्येक विषय से 30-30 प्रश्न पूछे जाएंगे।
परीक्षा की अवधि 2 घंटे 30 मिनट रहेगी। खास बात यह है कि परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को परीक्षा में कम से कम 60 अंक, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को 50 अंक हासिल करना अनिवार्य होगा।
माध्यमिक शिक्षकों की परीक्षा में 120 प्रश्न
माध्यमिक शिक्षकों के लिए परीक्षा का पैटर्न अलग रहेगा। अभ्यर्थियों को अपनी पात्रता के अनुसार हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में से निर्धारित विषय का पेपर चुनना होगा। परीक्षा में 120 प्रश्न होंगे और प्रत्येक प्रश्न एक अंक का रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हो रही परीक्षा
यह विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आयोजित की जा रही है। जानकारी के अनुसार वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को पात्रता परीक्षा देनी होगी। कक्षा 8वीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए TET उत्तीर्ण करना आवश्यक बताया गया है।
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर यह प्रक्रिया शुरू की गई है। यानी लंबे समय से स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों को भी अब अपनी पात्रता परीक्षा के जरिए साबित करनी होगी।
दो साल में पास करनी होगी परीक्षा, नहीं तो सेवा पर संकट
शिक्षकों को TET पास करने के लिए दो साल का समय दिया जाएगा। निर्धारित समय सीमा में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने वाले शिक्षकों की सेवा समाप्त हो सकती है। हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से कम समय बचा है, उन्हें परीक्षा से छूट दी गई है।