मध्यप्रदेश

वैज्ञानिक साक्ष्यों से मजबूत होगी अपराधों की विवेचना, CID की तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न, अपराध स्थल की फोटोग्राफी, डिजिटल साक्ष्य संकलन और न्यायालयीन प्रमाणीकरण की बारीकियों से पुलिस अधिकारियों को कराया अवगत

जनलोक टाईम्स से रामेश्वर त्रिपाठी की रिपोर्ट

भोपाल- अपराधों की विवेचना को आधुनिक, वैज्ञानिक और साक्ष्य आधारित बनाने के उद्देश्य से अपराध अनुसंधान विभाग (CID) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला का पुलिस मुख्यालय भोपाल में सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वैज्ञानिक पद्धतियों, साक्ष्य संकलन, अपराध स्थल के दस्तावेजीकरण तथा न्यायालय में साक्ष्यों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया गया।

समापन अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग श्री पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान समय में अपराधों की प्रकृति लगातार जटिल होती जा रही है। ऐसे में विवेचना को वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधार पर मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने अनुसंधान अधिकारियों से उपलब्ध आधुनिक उपकरणों का अधिकाधिक व्यावहारिक उपयोग करने तथा विशेषज्ञ की अनुपस्थिति में भी दक्षतापूर्वक अनुसंधान करने का आह्वान किया।

श्री श्रीवास्तव ने डीएनए एवं डिजिटल साक्ष्य संकलन पर इंटरेक्टिव सत्र लेते हुए प्रशिक्षणार्थियों से संवाद किया और प्रश्नों के माध्यम से उनकी समझ को परखा। उन्होंने पुलिसकर्मियों को अपनी व्यावसायिक दक्षता लगातार बेहतर बनाने तथा पीड़ितों को त्वरित एवं सटीक न्याय दिलाने में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

घटनास्थल की फोटोग्राफी को बताया विवेचना का अहम हिस्सा

कार्यशाला में उप पुलिस अधीक्षक (फोटो), अपराध अनुसंधान विभाग, भोपाल श्री अमिताभ तिवारी एवं निरीक्षक श्री जाम सिंह ने अपराध घटनास्थल की फोटोग्राफी के तकनीकी एवं वैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी दी। प्रशिक्षणार्थियों को बताया गया कि घटनास्थल पर उपलब्ध साक्ष्यों को उनकी मूल स्थिति में बिना किसी छेड़छाड़ के व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकृत करना बेहद जरूरी है।

प्रशिक्षण के दौरान Overall, Mid-range और Close-up Photography की प्रक्रिया के साथ घटनास्थल की वीडियोग्राफी, मृत शरीर, अस्त्र-शस्त्र, रक्त के धब्बे, पदचिह्न एवं अन्य भौतिक साक्ष्यों के फोटोग्राफिक दस्तावेजीकरण की मानक प्रक्रिया समझाई गई।

‘चेन ऑफ कस्टडी’ और कोर्ट ऑथेंटिकेशन पर विशेष जोर

श्री तिवारी ने फोटोग्राफिक साक्ष्यों के न्यायालयीन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया भी विस्तार से समझाई। इसमें साक्ष्यों की Chain of Custody, समय-दिनांक एवं जियो-लोकेशन का उल्लेख तथा न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करते समय आवश्यक विधिक सावधानियों की जानकारी दी गई। डिजिटल फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी में साक्ष्यों की प्रामाणिकता बनाए रखने के तकनीकी उपायों पर भी चर्चा हुई।

कार्यशाला के अंतिम सत्र में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की समीक्षा की गई तथा प्रतिभागियों से विभिन्न सत्रों, विषय-वस्तु और प्रशिक्षण की व्यावहारिक उपयोगिता को लेकर फीडबैक लिया गया।

समापन कार्यक्रम में पुलिस उप महानिरीक्षक श्री साकेत पाण्डेय एवं श्री प्रशांत खरे, सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्री मनीष खत्री सहित FSL, डॉक्यूमेंट, फिंगरप्रिंट, कम्प्यूटर्स एवं फोटो शाखा के विषय-विशेषज्ञ तथा प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।

वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रभावी पुलिसिंग का आधार बनाने की पहल

तीन दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तकनीकी और व्यावहारिक दक्षता बढ़ाने के साथ अपराध अनुसंधान में वैज्ञानिक साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया गया। कार्यशाला से प्रतिभागियों को अपराध स्थल के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, फोटोग्राफिक एवं डिजिटल साक्ष्यों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण तथा न्यायालयीन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध अनुसंधान को वैज्ञानिक, तकनीक आधारित और साक्ष्य-केंद्रित बनाने की दिशा में आयोजित ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विवेचना की गुणवत्ता बढ़ाने और न्यायालयीन प्रक्रिया में साक्ष्यों की प्रभावशीलता मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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