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घुघरी में फर्जी समिति बनाकर राशि हड़पने आरोप, 25 वर्षों के हिसाब-किताब और बैंक खाते की जांच की मांग, कलेक्टर-एसपी के साथ उमरियापान थाना प्रभारी से हुई शिकायत

जनलोक टाईम्स से सोनू त्रिपाठी की रिपोर्ट

कटनी- ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र के ग्राम घुघरी की मस्जिद की राशि एवं समिति के संचालन को लेकर विवाद सामने आया है। गांव के बहना समुदाय के आवेदकों ने पुलिस अधीक्षक कटनी श्री अभिनव विश्कर्मा को लिखित शिकायत सौंपकर मस्जिद की राशि के कथित दुरुपयोग, फर्जी समिति गठित करने और बैंक खाते के माध्यम से राशि के लेन-देन की जांच कराने की मांग की है।

शिकायत में बताया गया है कि ग्राम घुघरी में मुस्लिम समाज के दो समुदाय निवास करते हैं। आवेदकों के अनुसार ग्राम की मस्जिद से संबंधित भूमि के राजस्व अभिलेखों में अलग-अलग खसरा नंबर दर्ज हैं। शिकायत में खसरा नंबर 224, 47 तथा 101, 102, 103/1 की भूमि का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि संबंधित भूमि वर्तमान में रजा कमेटी जमा मस्जिद घुघरी एवं प्रबंधक के नाम से राजस्व अभिलेखों में दर्ज है।

नायब तहसीलदार के आदेश के बाद समिति को लेकर उठा विवाद

शिकायत के अनुसार नायब तहसीलदार उमरियापान द्वारा 1 फरवरी 2025 को आदेश पारित कर दोनों समुदायों के सदस्यों को समिति में शामिल करने तथा दोनों समुदायों के पदाधिकारियों के नाम से बैंक में संयुक्त खाता खोलने संबंधी प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था। इसके बाद मामला अनुविभागीय अधिकारी ढीमरखेड़ा के समक्ष भी पहुंचा।

आवेदकों का आरोप है कि समिति के संबंध में प्रस्तुत दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति में विरोधाभास है। शिकायत में कहा गया है कि एक ओर रजा मस्जिद कमेटी के नाम का उल्लेख किया गया, जबकि दूसरी ओर रजा जन कल्याण समिति के नाम से दस्तावेज और बैंक खाता सामने आया।

बैंक खाते और राशि के उपयोग पर भी सवाल

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि रजा जन कल्याण समिति के नाम से जिला सहकारी बैंक उमरियापान में खाता खोलकर मस्जिद की राशि का उपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि समिति के नाम, पदाधिकारियों और पंजीयन से जुड़े दस्तावेजों में भी अंतर दिखाई देता है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मस्जिद की कृषि एवं चंदा दान से प्राप्त राशि का करीब 25 वर्षों से विधिवत हिसाब-किताब नहीं किया गया तथा राशि का ऑडिट भी नहीं कराया गया। आवेदकों ने पूरे मामले की वित्तीय जांच कराने की मांग की है।

समिति गठन और पंजीयन की जांच की मांग

शिकायत के अनुसार वर्ष 2026 में रजा जन कल्याण समिति के नाम से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जबकि आवेदकों का दावा है कि मस्जिद के संचालन के लिए ग्राम समाज की सहमति से ऐसी समिति गठित नहीं की गई थी। शिकायतकर्ताओं ने समिति के गठन, पंजीयन प्रमाण-पत्र, पदाधिकारियों तथा बैंक खाते की वैधानिकता की जांच कराने की मांग की है।

आवेदकों ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर मस्जिद की संपत्ति एवं उससे प्राप्त राशि का पिछले वर्षों का हिसाब-किताब सामने लाने तथा यदि दस्तावेजों में कूटरचना अथवा राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

मस्जिद की प्रबंधन समिति और उसके पंजीयन को लेकर विवाद सामने आया है। मामले में एक शिकायत के माध्यम से समिति के पदाधिकारियों पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने, शासन एवं समाज को गुमराह करने तथा राशि के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किए जाने की मांग की है।

शिकायत में उल्लेख किया गया है कि मस्जिद के गेट पर बिना पंजीयन के एक पत्र चस्पा किया गया, जिसमें रजा जन कल्याण समिति का पंजीयन क्रमांक 25493 दर्शाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार पत्र में दिनांक 28 जून 2026 का उल्लेख करते हुए समिति के नाम और पंजीयन को लेकर कथित तौर पर भ्रम की स्थिति उत्पन्न की जा रही है।

शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि संबंधित पत्र में दर्शाए गए पदाधिकारियों और रजा जन कल्याण समिति के पदाधिकारियों के नामों में अंतर है। शिकायतकर्ता ने इसे प्रथम दृष्टया संदिग्ध बताते हुए समिति की वास्तविकता, पंजीयन दस्तावेजों और पदाधिकारियों की वैधता की जांच की मांग की है।

राशि के दुरुपयोग का भी आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कथित फर्जी समिति के माध्यम से समाज से राशि एकत्र कर उसके दुरुपयोग की आशंका है। शिकायत में इस पूरे मामले को धोखाधड़ी एवं राशि हड़पने की श्रेणी में बताते हुए जांच की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस और प्रशासन से जांच की मांग

शिकायत के साथ संबंधित दस्तावेज संलग्न किए जाने का उल्लेख है। शिकायत की प्रतिलिपि एसडीओपी स्लीमनाबाद, थाना प्रभारी उमरियापान तथा असिस्टेंट रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटीज, जबलपुर संभाग को भेजे जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा दोष सिद्ध होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

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