राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से बातचीत में बच्चों के टैलेंट को पहचानने और उनके बेहतर भविष्य निर्माण पर हुई चर्चा
नई दिल्ली- शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों से संवाद किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने शिक्षकों के अनुभव सुने और बच्चों के बेहतर भविष्य निर्माण, उनकी प्रतिभा पहचानने तथा शिक्षा के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व विकास पर चर्चा की।
संवाद के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से पूछा कि यदि कोई बच्चा पढ़ाई में अपेक्षाकृत कमजोर है, तो क्या शिक्षक उसकी दूसरी प्रतिभाओं को पहचानने का प्रयास करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “हो सकता है एक-आध बच्चा शिक्षा में ठीक नहीं होगा, लेकिन परमात्मा ने हर एक को कोई न कोई ताकत दी होती है। क्या आप लोग उसके टैलेंट को पहचानने के लिए कोई कोशिश करते हैं?”
प्रधानमंत्री के सवाल पर शिक्षकों ने बताया कि बच्चों की अलग-अलग क्षमताओं और रुचियों को पहचानने के लिए वे लगातार प्रयास करते हैं। शिक्षकों ने कहा कि कक्षा में मौजूद प्रत्येक बच्चे में अलग-अलग खूबियां, प्रतिभाएं और चुनौतियां होती हैं। एक शिक्षक की जिम्मेदारी है कि वह इन अलग-अलग प्रतिभाओं को पहचानकर बच्चों को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए।
शिक्षकों ने कहा कि उनका प्रयास केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक बच्चे की क्षमता को समझकर उसके अनुरूप मार्गदर्शन देना भी उनकी प्राथमिकता है। संवाद के दौरान शिक्षा को बच्चों के सर्वांगीण विकास और उज्ज्वल भविष्य की नींव बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि बच्चों की छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारने वाले मार्गदर्शक भी हैं।