मध्यप्रदेश
कागजों पर नहीं, कक्षाओं में बनता है देश का भविष्य शिक्षक राष्ट्र निर्माण की भावी पीढ़ी के शिल्पकार : राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल
जनलोक टाईम्स से रामेश्वर त्रिपाठी की रिपोर्ट

सीएम डॉ. मोहन यादव बोले जहां गुरूर खत्म, गुण शुरू, वहीं पैदा होती है गुरु की दृष्टि, राष्ट्र निर्माण की भावी पीढ़ी के शिल्पकार हैं शिक्षक,
भोपाल- शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि वे ज्ञान, संस्कार और नैतिक मूल्यों से राष्ट्र की भावी पीढ़ी का निर्माण करते हैं। शिक्षक बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक बनें। यह बात राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह-2026 को संबोधित करते हुए कही।

राज्यपाल ने कहा कि बच्चों की पहली पाठशाला उनका घर होता है, जहां माता-पिता उन्हें प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार देते हैं। इसके बाद शिक्षक उनके व्यक्तित्व को दिशा देकर उन्हें आदर्श नागरिक बनाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की बुद्धि, क्षमता और अपेक्षाओं को समझते हुए आत्मीयता, धैर्य और सहनशीलता के साथ शिक्षण करने का आह्वान किया।
“बच्चे विकसित भारत के कर्णधार, शिक्षक उनके शिल्पकार”
राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि बच्चे विकसित भारत के कर्णधार हैं और शिक्षक इन कर्णधारों के शिल्पकार हैं। इसलिए शिक्षकों को स्वयं ज्ञान और नैतिक गुणों का आदर्श बनना होगा। विद्यार्थियों में ईमानदारी, सहनशीलता और जुझारूपन जैसे गुण विकसित कर उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना शिक्षक का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक आवश्यकताओं और रोजगार के नए अवसरों को देखते हुए शिक्षा में निरंतर अपडेशन, अपग्रेडेशन और इनोवेशन जरूरी है। भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़कर शिक्षा को नई शक्ति देनी होगी। कला, विज्ञान, खेल, कौशल और व्यावसायिक शिक्षा के बीच की दीवारें हटाकर विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुसार विषय चुनने का अवसर मिलना चाहिए।
सीएम बोले—“देश की किस्मत कक्षाओं में बनाते हैं गुरुजन”
समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर बताया। उन्होंने कहा, “जहां गुरूर खत्म होता है और गुण शुरू होता है, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है। गुरु की दृष्टि से ही शिक्षित समाज की सृष्टि होती है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक स्वयं अंधेरे में रहकर अपने विद्यार्थियों के जीवन को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करने वाले दीपक की तरह हैं। उन्होंने कहा कि देश का नक्शा कागजों पर बनता है, लेकिन देश की किस्मत हमारे गुरुजन कक्षाओं में बनाते हैं।





