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जनसुनवाई पर रेत माफिया पर सवालों की बौछार, एसपी की चुप्पी ने खड़े किए पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल!

जनलोक टाईम्स से सोनू त्रिपाठी की रिपोर्ट

सोशल मीडिया पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के वीडियो और नंबर स्पष्ट होने के बावजूद कार्रवाई पर उठे सवाल, पत्रकारों ने पुलिस व प्रसासनिक कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी

कटनी/ढीमरखेड़ा- ढीमरखेड़ा तहसील मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित जनसुनवाई में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में पत्रकारों ने क्षेत्र में खुलेआम हो रहे रेत के अवैध परिवहन और उस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर पुलिस अधीक्षक से सवाल किए। जिस पर एसपी सवालों का स्पष्ट जवाब देने के बजाय मामले से बचते नजर आए ?

पत्रकारों ने सवाल उठाया कि ढीमरखेड़ा क्षेत्र में आए दिन रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। कई वीडियो में वाहनों के नंबर तक स्पष्ट दिखाई देते हैं। इसके अलावा रेत कहां से निकाली जा रही है और किसके द्वारा परिवहन किया जा रहा है, इसकी जानकारी भी सामने आती रहती है। इसके बावजूद पुलिस और संबंधित विभाग इन सूचनाओं के आधार पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहे हैं?

पत्रकारों ने यह भी पूछा कि लगातार शिकायतों और वीडियो सामने आने के बाद भी अवैध रेत परिवहन पर अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है? आखिर ऐसी कौन सी वजह है कि खुलेआम सड़कों पर दौड़ती रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती?

पुलिस अधीक्षक ने इन सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय कलेक्टर से पूछने की बात कही। इससे पत्रकारों को अपने सवालों का अपेक्षित जवाब नहीं मिल सका। पत्रकारों ने एसपी के व्यवहार पर भी नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि सवाल पूछने के दौरान उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना गया और उन्हें नजरअंदाज किया गया।

जनसुनवाई में सवालों से बचना जवाबदेही पर सवाल

जनसुनवाई का उद्देश्य केवल शिकायतें सुनने की औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि आम जनता की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना भी है। ऐसे में जब क्षेत्र की गंभीर समस्या को लेकर पत्रकार वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से सवाल करते हैं, तो उन सवालों का स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब मिलना अपेक्षित है। पत्रकारों का कहना है कि यदि जनहित से जुड़े सवाल भी अधिकारियों के सामने नहीं उठाए जाएंगे, तो आम जनता की समस्याओं और प्रशासनिक जवाबदेही की आवाज कौन बनेगा?

अवैध रेत कारोबार पर कार्रवाई का इंतजार

ढीमरखेड़ा क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। जनसुनवाई में इस मुद्दे के उठने के बाद अब पुलिस और खनिज विभाग की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। सवाल यह है कि सोशल मीडिया पर सामने आ रहे वीडियो और वाहनों की पहचान से जुड़ी जानकारियों के बावजूद अवैध रेत कारोबार पर प्रभावी अंकुश कब लगेगा? क्या संबंधित विभाग इन शिकायतों को गंभीरता से लेकर ठोस कार्रवाई करेंगे या यह मुद्दा भी सवालों और आश्वासनों तक ही सीमित रह जाएगा?

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