मध्यप्रदेश

जनसुनवाई में मुद्दा उठते ही हरकत में आया प्रशासन, रेत खदानों का संयुक्त टीम ने किया निरीक्षण, दतला, दशरमन और कछारगांव की स्वीकृत खदानों का लिया जायजा, अवैध परिवहन रोकने बनाया चेक पॉइंट

जनलोक टाईम्स से सोनू त्रिपाठी की रिपोर्ट

कटनी/ढीमरखेड़ा- ढीमरखेड़ा क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के मामले को जनसुनवाई में उठाए जाने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। कलेक्टर आशीष तिवारी एवं पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा के निर्देश पर रविवार को पुलिस और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने क्षेत्र की रेत खदानों एवं उनसे जुड़े परिवहन मार्गों का सघन निरीक्षण किया। साथ ही अवैध रेत परिवहन पर निगरानी रखने के लिए एक चेक पॉइंट भी स्थापित किया गया है।

गौरतलब है कि शुक्रवार को ढीमरखेड़ा विकासखंड मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान पत्रकारों ने क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश नहीं लगने का मुद्दा कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के समक्ष उठाया था। इस पर दोनों अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इसके बाद रविवार को प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण एवं निगरानी की कार्रवाई शुरू की।

निरीक्षण के दौरान दतला, दशरमन और कछारगांव स्थित स्वीकृत रेत खदानों का जायजा लिया गया। टीम ने खदानों तक पहुंचने के लिए बनाए गए अस्थायी कच्चे रास्तों को भी चिन्हित किया। प्रशासन द्वारा इन रास्तों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि इनका इस्तेमाल कर अवैध रेत परिवहन की गतिविधियों को अंजाम नहीं दिया जा सके।

अवैध परिवहन पर नजर रखेगा संयुक्त चेक पॉइंट

रेत के अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए क्षेत्र में चेक पॉइंट बनाया गया है। यहां पुलिस और खनिज विभाग का अमला संयुक्त रूप से निगरानी करेगा। संदिग्ध वाहनों की आवाजाही पर नजर रखने के साथ अवैध परिवहन की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य एवं उप संचालक खनिज रत्नेश दीक्षित के मार्गदर्शन में यह निरीक्षण एवं कार्रवाई की गई। इस दौरान ढीमरखेड़ा एवं सिलौड़ी थाना प्रभारी सहित संबंधित पुलिस बल और खनिज विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

प्रशासन ने रेत उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए निगरानी और कार्रवाई लगातार जारी रखने की बात कही है। जनसुनवाई में उठे मुद्दे के बाद हुई इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध रेत कारोबार पर अंकुश लगाने की प्रशासनिक मंशा सामने आई है। अब देखना होगा कि यह निगरानी व्यवस्था अवैध रेत परिवहन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।

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