कटनी- कटनी जिले की बड़वारा विधानसभा क्षेत्र में कथित रूप से चल रही अवैध शराब पैकारियों और अवैध मदिरा की बिक्री पर अंकुश लगाने की मांग को लेकर क्षेत्रीय भाजपा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह द्वारा पुलिस कप्तान को लिखे गए कड़े पत्र के बाद भी धरातल पर स्थितियां जस की तस बनी हुई हैं। विधायक द्वारा कटनी पुलिस अधीक्षक श्री अभिनव विश्वकर्मा को बाकायदा पत्राचार कर क्षेत्र में चल रहे इस अवैध कारोबार के खिलाफ विशेष अभियान चलाने और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई थी।हालांकि, विधायक के इस पत्र के हफ़्तों बीत जाने के बाद भी क्षेत्र में अवैध पैकारियों पर कोई ठोस या असरदार पुलिसिया कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है, जिससे अब स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली और मंशा पर भी सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। कटनी जिले का बड़वारा विधानसभा क्षेत्र पिछले लंबे समय से कथित रूप से अवैध शराब के नेटवर्क और गांव-गांव फैली पैकारियों की समस्या से जूझ रहा है। ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह अवैध रूप से देशी व अंग्रेजी शराब बेचे जाने की शिकायतें लगातार जन प्रतिनिधियों और पुलिस अधिकारियों तक पहुंच रही थीं। क्षेत्रीय जनता के बढ़ते आक्रोश और सामाजिक माहौल खराब होने की शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए क्षेत्रीय भाजपा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने प्रशासनिक स्तर पर इस समस्या से निपटने के लिए कदम उठाया। उन्होंने कटनी एसपी अभिनव विश्वकर्मा को एक शासकीय पत्र प्रेषित कर बड़वारा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रमुख थाना और चौकी क्षेत्रों का विशेष रूप से उल्लेख किया।ढीमरखेड़ा थाना क्षेत्र
सिलौड़ी पुलिस चौकी क्षेत्र, उमरियापान थाना क्षेत्र, स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र
पत्र में विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि इन थाना क्षेत्रों और इनसे लगे ग्रामीण अंचलों में कथित तौर पर अवैध पैकारियां निर्बाध रूप से संचालित हो रही हैं। शराब माफिया और अवैध विक्रेता गांवों के चौराहों, ढाबों, पान की दुकानों और रिहाइशी मकानों तक में अवैध रूप से मदिरा उपलब्ध करा रहे हैं। इससे न केवल कानून-व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि युवा पीढ़ी और ग्रामीण परिवार भी तबाही के कगार पर पहुंच रहे हैं।विधायक ने एसपी से मांग की थी कि पूरे क्षेत्र में पुलिस टीम गठित कर एक विशेष अभियान चलाया जाए और अवैध कारोबारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
पत्र के बाद भी कार्रवाई सुस्त, सवाल के घेरे में खाकी
सत्तारूढ़ दल के विधायक द्वारा पत्र लिखे जाने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आएगा और बड़वारा क्षेत्र में अवैध शराब कारोबारियों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू होगी। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विधायक के पत्र के सार्वजनिक होने और पुलिस मुख्यालय तक मामला पहुंचने के बाद भी थाना और चौकी स्तर पर कोई बड़ी या असरदार कार्रवाई नहीं की गई। इक्का-दुक्का औपचारिक कार्रवाइयों को छोड़कर किसी बड़े शराब पैकारी नेटवर्क या माफिया के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलते ही ढीमरखेड़ा, सिलौड़ी, उमरियापान और स्लीमनाबाद के कई गांवों में अवैध शराब की बिक्री बिना किसी डर के जारी रहती है। इस स्थिति ने अब स्थानीय पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब सत्ताधारी दल के विधायक की लिखित शिकायत पर भी पुलिस महकमा सुस्त पड़ा हुआ है, तो फिर आम नागरिक की सुनवाई की क्या उम्मीद की जा सकती है ग्रामीण अंचलों में सामाजिक ताना-बाना हो रहा छिन्न-भिन्न
बड़वारा विधानसभा क्षेत्र एक बड़ा और अधिकतर ग्रामीण आबादी वाला इलाका है।ढीमरखेड़ा, उमरियापान और स्लीमनाबाद जैसे क्षेत्र कृषि और मजदूरी पर आधारित हैं। गांवों में अवैध शराब की पैकारियों के आसान विस्तार का सबसे बुरा असर गरीब और मजदूर परिवारों पर पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों पर असर अवैध शराब बिक्री के कारण ग्रामीण इलाकों में शाम होते ही अराजकता का माहौल बन जाता है। शराब के नशे में धुत असामाजिक तत्वों के कारण महिलाओं, बेटियों और बच्चों का घरों से निकलना दूभर हो गया है।घरेलू हिंसा और पारिवारिक क्लेश के मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।युवाओं में नशे की लत गांव-गांव तक शराब की सुलभ उपलब्धता के कारण कम उम्र के नवयुवक और किशोर भी नशे की गर्त में धकेले जा रहे हैं, जो क्षेत्र के भविष्य के लिए एक चिंताजनक संकेत है। अपराधों में बढ़ोतरी अवैध पैकारियों के आसपास अक्सर जुआ, मारपीट और आपसी विवाद की घटनाएं आम बात बन चुकी हैं।स्थानीय लोगों का मानना है कि छोटे-मोटे अपराधों की जड़ में यह अवैध शराब कारोबार ही है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल
क्षेत्रीय विधायक द्वारा विशिष्ट थानों (ढीमरखेड़ा, उमरियापान, स्लीमनाबाद और सिलौड़ी चौकी) के नाम उजागर किए जाने के बाद भी यदि वहां अवैध गतिविधियां बदस्तूर जारी हैं, तो इससे पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र (बीट व्यवस्था) की पोल खुलती है।
क्या सांठगांठ का है खेल क्षेत्रीय नागरिकों का दबे स्वर में कहना है कि बिना स्थानीय पुलिस की अनदेखी या शह के गांव-गांव में इस पैमाने पर अवैध शराब की आपूर्ति संभव नहीं है। केवल कागजी खानापूर्ति जब भी दबाव बढ़ता है, पुलिस एकाध छोटे-मोटे शराब ढोने वाले या छोटे विक्रेता पर आबकारी कानून की हल्की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर खानापूर्ति कर लेती है, जबकि मुख्य पैकारी संचालक और बड़े सप्लायर पुलिस की पकड़ से हमेशा बाहर रहते हैं।
अभियान का अभाव विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने जिस ‘विशेष अभियान’ की मांग की थी, वैसा कोई सुगठित या निरंतर अभियान क्षेत्र में देखने को नहीं मिला।
जनता को अब भी ठोस कार्रवाई का इंतजार
भाजपा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह का पत्र केवल एक राजनीतिक या प्रशासनिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह बड़वारा क्षेत्र की जनता की उस पीड़ा और आक्रोश का प्रतिनिधित्व करता है, जो वे लंबे समय से झेल रहे हैं। कटनी एसपी अभिनव विश्वकर्मा को लिखे गए इस पत्र ने गेंद अब पूरी तरह से जिला पुलिस प्रशासन के पाले में डाल दी है। अब देखना यह होगा कि कटनी पुलिस प्रशासन कब नींद से जागता है और बड़वारा विधानसभा क्षेत्र के ढीमरखेड़ा, सिलौड़ी, उमरियापान और स्लीमनाबाद इलाकों में सक्रिय अवैध शराब पैकारियों के खिलाफ कब सख्त, पारदर्शी और निर्णायक कदम उठाता है। यदि जल्द ही कोई बड़ा अभियान चलाकर इस अवैध नेटवर्क को ध्वस्त नहीं किया गया, तो पुलिस प्रशासन के प्रति जन-आक्रोश और अधिक गहराना तय है।