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सीहोर में आदिवासियों के आशियाने उजड़े, 12 मकान ढहाए और फसलें बर्बाद!, पीड़ित परिवारों का दर्द सुन भड़के शिवराज सिंह चौहान, मुख्य सचिव से की बात; बोले- गरीबों को बेघर करने वालों को बख्शा नहीं जाए

जनलोक टाईम्स से रामेश्वर त्रिपाठी की रिपोर्ट

सीहोर- मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में वन विकास निगम की कार्रवाई ने आदिवासी परिवारों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। कार्रवाई के दौरान 12 मकान तोड़े जाने और फसलें नष्ट किए जाने का मामला सामने आया है। जिन घरों में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब परिवारों के सामने रहने और गुजर-बसर करने की चिंता है। घटना से प्रभावित परिवारों में नाराजगी और बेचैनी का माहौल है।

पीड़ित परिवारों का दर्द सुनने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान कोसमी गांव पहुंचे। महिलाओं ने जब अपनी पीड़ा बयां की तो शिवराज ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों को इस तरह बेघर करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने पीड़ितों को न्याय दिलाने और उनके पुनर्वास के लिए हर संभव प्रयास करने का भरोसा दिया।

मुख्य सचिव को फोन, नए मकानों की व्यवस्था करने की बात

मामले को गंभीरता से लेते हुए शिवराज सिंह चौहान ने मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से फोन पर बात की। उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए नए मकान बनवाने और स्थायी व्यवस्था होने तक उनके रहने-खाने का इंतजाम करने की बात कही। शिवराज ने यह मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने उठाने और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग भी की।
मौके पर बड़े अधिकारी नहीं मिले, शिवराज ने जताई नाराजगी

घटना के बाद प्रभावित परिवारों की सुध लेने के लिए मौके पर वन विकास निगम और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी शिवराज ने नाराजगी जताई। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को फोन कर घटनाक्रम की जानकारी दी।

अब पुनर्वास और कार्रवाई पर टिकी नजरें

12 मकानों के टूटने और फसलों के नष्ट होने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने आवास और आजीविका का सवाल खड़ा है। शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ितों को न्याय दिलाने की बात कही है। अब देखना होगा कि प्रभावित परिवारों को नए मकान, तत्काल राहत और स्थायी पुनर्वास कब तक मिलता है तथा मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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