उज्जैन- ऑनलाइन ठगी के मामलों में आमतौर पर माना जाता है कि ओटीपी या यूपीआई पिन बताए बिना बैंक खाते से रकम निकालना मुश्किल है। लेकिन उज्जैन में नगर निगम के एक ठेकेदार के खाते से 49,999 रुपए की निकासी ने इस धारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित का कहना है कि कुछ दिन पहले बैंक अधिकारी के नाम से फोन आया था, लेकिन उन्होंने न तो ओटीपी बताया और न ही कोई अन्य बैंकिंग जानकारी साझा की थी। इसके बावजूद उनके यूको बैंक खाते से रकम निकल गई।
ट्रांजेक्शन मैसेज से हुई जानकारी
जीवाजीगंज पुलिस के अनुसार हरिजन बस्ती, भैरूनाला निवासी संजय (45) पिता जगदीश कलोसिया नगर निगम में ठेकेदार हैं। पुलिस के मुताबिक उनके बैंक खाते से अज्ञात व्यक्ति ने 49,999 रुपए निकाल लिए। मोबाइल पर ट्रांजेक्शन का मैसेज आने के बाद उन्हें खाते से रकम निकलने की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने अपने अन्य बैंक खातों की भी जानकारी ली और मामले की शिकायत पुलिस से की। जीवाजीगंज पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ओटीपी नहीं मांगा गया, फिर भी हो सकता है फ्रॉड
साइबर एक्सपर्ट शोभित चतुर्वेदी के अनुसार केवल ओटीपी सुरक्षित रखने से बैंक खाता पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। बैंकिंग क्रेडेंशियल किसी संदिग्ध लिंक के जरिए चोरी होना, सिम से जुड़ी गड़बड़ी, इंटरनेट बैंकिंग या यूपीआई एक्सेस का दुरुपयोग अथवा पहले से कॉम्प्रोमाइज डिवाइस के जरिए भी ट्रांजेक्शन किया जा सकता है।
साइबर एक्सपर्ट की सलाह
अनजान APK या संदिग्ध एप मोबाइल में इंस्टॉल न करें।
WhatsApp, SMS या ई-मेल से आए संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
UPI PIN केवल भुगतान के समय दर्ज करें और किसी को न बताएं।
बिना जरूरत स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस एप न रखें।
बैंकिंग ऐप और मोबाइल का ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट रखें।
बैंक खाते में ट्रांजेक्शन अलर्ट सक्रिय रखें।
किसी अनजान डेबिट या यूपीआई ट्रांजेक्शन की जानकारी मिलते ही बैंक को सूचना देकर संबंधित एक्सेस ब्लॉक कराएं।