मध्यप्रदेश
15 वर्ष पूर्व मृत शिक्षक की पोर्टल में पदस्थापना, जीवित शिक्षक घोषित हुए अतिशेष, शिक्षा विभाग की ऑनलाइन व्यवस्था पर उठे सवाल, सुधार नहीं होने से शिक्षक को हो रही परेशानी
जनलोक टाइम्स से सोनू त्रिपाठी की रिपोर्ट

कटनी- शिक्षा विभाग के एजुकेशन पोर्टल 3.0 में दर्ज त्रुटियों के कारण एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। संकुल केंद्र कन्या उमरियापान अंतर्गत प्राथमिक शाला मंगेली में लगभग 15 वर्ष पूर्व मृत हो चुके शिक्षक की पदस्थापना आज भी पोर्टल में प्रदर्शित हो रही है, जबकि वर्तमान में विद्यालय में केवल दो ही शिक्षक कार्यरत हैं। इस तकनीकी एवं प्रशासनिक लापरवाही के चलते एक कार्यरत शिक्षक का नाम अतिशेष सूची में शामिल हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्राथमिक शाला मंगेली की स्थापना वर्ष 2011 में हुई थी। विद्यालय में समय-समय पर विभिन्न शिक्षकों की पदस्थापना हुई, जिनमें राजकिशोर दाहिया भी शामिल थे। वर्ष 2017 में उनका निधन हो चुका है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अप्रैल 2026 से एजुकेशन पोर्टल में उनकी पदस्थापना पुनः प्रदर्शित होने लगी। विद्यालय में कार्यरत शिक्षक ने बताया कि उन्होंने कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से संकुल, विकासखंड शिक्षा कार्यालय तथा जिला शिक्षा कार्यालय को इस त्रुटि से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं किया गया। परिणामस्वरूप 19 जून 2026 को जारी अतिशेष शिक्षकों की सूची में उनका नाम शामिल कर दिया गया, जबकि विद्यालय में वास्तविक रूप से केवल दो शिक्षक ही पदस्थ हैं और उनमें से एक शिक्षक वर्तमान में चिकित्सा अवकाश पर हैं। यह मामला केवल एक शिक्षक की व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि शिक्षा विभाग की डिजिटल व्यवस्था और अभिलेख प्रबंधन की गंभीर खामियों को उजागर करता है।यदि समय रहते पोर्टल में सुधार नहीं किया गया तो न केवल शिक्षकों के सेवा अधिकार प्रभावित होंगे, बल्कि विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था भी बाधित होगी। शिक्षक ने जिला शिक्षा अधिकारी कटनी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी ढीमरखेड़ा से एजुकेशन पोर्टल 3.0 में तत्काल सुधार कर मृत शिक्षक की पदस्थापना विलोपित करने तथा वास्तविक स्थिति के आधार पर अतिशेष सूची का पुनरीक्षण करने की मांग की है। डिजिटल युग में शासन की अधिकांश व्यवस्थाएं ऑनलाइन पोर्टलों पर आधारित हो चुकी हैं। ऐसे में यदि पोर्टल में दर्ज जानकारी ही गलत हो तो उसके दुष्परिणाम सीधे कर्मचारियों और आम जनता को भुगतने पड़ते हैं। मृत शिक्षक का वर्षों बाद पुनः पदस्थ दिखना और कार्यरत शिक्षक का अतिशेष घोषित होना प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। शिक्षा विभाग को इस मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रुटियां दोबारा न हों।






