छिंदवाड़ा- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को छिंदवाड़ा से मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान 2026 का शुभारंभ किया। अभियान के पहले ही दिन मुख्यमंत्री ने आमजन की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया। शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए छिंदवाड़ा के CMHO, एक तहसीलदार और एक पटवारी को निलंबित करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री के इस सख्त रुख से प्रशासनिक अमले में हड़कंप की स्थिति बन गई।
एफडीडीआई ऑडिटोरियम में आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जन-विश्वास अभियान का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का मौके पर समाधान करना और मैदानी स्तर पर शासकीय व्यवस्थाओं में आने वाली कठिनाइयों को दूर करना है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से जनता की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करने का आह्वान किया।
हर शुक्रवार जनता के बीच रहेगा प्रशासन
मुख्यमंत्री ने कहा कि जन-विश्वास अभियान 7 जनवरी 2027 तक प्रत्येक शुक्रवार संचालित किया जाएगा। इस दौरान अधिकारी मैदानी क्षेत्रों में पहुंचकर शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति देखेंगे तथा आमजन की समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित करेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब प्रत्येक शुक्रवार को सरकारी कार्यालयों में नियमित बैठकों का आयोजन नहीं किया जाएगा। अधिकारी-कर्मचारी जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनेंगे और शासन की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने की दिशा में काम करेंगे।
लोक सेवा केंद्र का किया निरीक्षण
अभियान के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छिंदवाड़ा कलेक्टर कार्यालय स्थित लोक सेवा केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं, व्यवस्थाओं और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आम नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा अनावश्यक रूप से किसी भी व्यक्ति को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
सीएम का संदेश- जनता की सेवा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
जन-विश्वास अभियान की शुरुआत के साथ ही तीन अधिकारियों के निलंबन को मुख्यमंत्री के जीरो टॉलरेंस और जवाबदेह प्रशासन के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ जनता तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। मैदानी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या आमजन को परेशान करने की शिकायतों पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।