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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर PM मोदी की अपील, ‘लोकल कपड़ों को दें बढ़ावा’

जनलोक टाईम्स से रामेश्वर त्रिपाठी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर स्थानीय कपड़ों को बढ़ावा देने की अपील की है। उन्होंने देशवासियों को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया। इसमें उन्होंने जनता से अपील करते हुए देश की पारंपरिक शिल्पकला और स्थानीय बुनाई को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने नागरिकों से स्थानीय कपड़ों की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए हैशटैग के साथ अपने ‘गेट रेडी विद मी’ (GRWM) वीडियो शेयर करने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने गुरुवार को क्रिएटिव ऑनलाइन पार्टिसिपेशन को बढ़ावा देने के लिए एक्स प्लेटफॉर्म का उपयोग किया। इसमें भारत की हथकरघा विविधता को लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। उन्होंने लिखा, “7 अगस्त राष्ट्रीय हथकरघा दिवस है। आइए भारत की हथकरघा विविधता को लोकप्रिय बनाएं। अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों के वीडियो, जिनमें GRWM वीडियो भी शामिल हैं, सोशल मीडिया पर साझा करें।

12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाएगा मंत्रालय

कपड़ा मंत्रालय 7 अगस्त को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाएगा, जिसमें भारत की हथकरघा विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा और देश के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में हथकरघा बुनकर समुदाय के योगदान को मान्यता दी जाएगी। कपड़ा मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में शामिल होंगी। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा, सचिव नीलम शमी राव और विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगी।

हथकरघा पुरस्कार विजेता होंगे शामिल

इस कार्यक्रम में संत कबीर हथकरघा पुरस्कार विजेता और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार विजेता अपने परिवार के सदस्यों के साथ, देश भर के हथकरघा बुनकर, पुरस्कार चयन समिति के सदस्य, हथकरघा क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्ति, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि और अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। समारोह में संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और 2025 के राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कारों का वितरण होगा। कुल 22 पुरस्कार वितरित होंगे, जिनमें तीन संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार शामिल हैं। हथकरघा बुनकरों को उनकी शिल्प कौशल, नवाचार और भारत की हथकरघा परंपराओं के संरक्षण में योगदान के लिए प्रदान किए जाएंगे। इस अवसर पर भारत की विविध हथकरघा बुनाई परंपराओं का जश्न मनाने वाले चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए जाएंगे।

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