जबलपुर- 15 अगस्त और 26 जनवरी के आसपास तिरंगे को लेकर जोश पूरे देश में दिखता है। लेकिन जबलपुर में ये जोश कुछ खास है। क्योंकि यहां जोश के साथ जुनून का भी तड़का लगता है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पूरे देश में तिरंगा यात्राएं निकाली जाती हैं। ज्यादातर तिरंगा यात्राएं सड़कों पर निकल जाती हैं। वाहन रैली भी निकालती हैं। लेकिन जबलपुर के कुछ दीवाने ऐसे भी हैं जो अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती नदी में 7 किलोमीटर तैरते हैं।
तिरंगा यात्रा में बच्चों से लेकर बुजुर्ग शामिल
नर्मदा में निकलने वाली तिरंगा यात्रा के दौरान तैराकों के हाथ में तिरंगा होता है। तैरने के दौरान भी ये भारत माता की जय के नारे लगाते हैं। जबलपुर में बीते 18 सालों से यह आयोजन लगातार चला आ रहा है। ये तिरंगा यात्रा जबलपुर के जिलहरी घाट से शुरू होकर तिलवारा घाट तक जाती। यह लंबाई लगभग 7 किलोमीटर की है। इसमें बच्चे, बूढ़े और जवानों के साथ महिलाएं भी हिस्सा लेती हैं। इस तिरंगा यात्रा की खास बात यह है कि ये यात्रा सड़क मार्ग से ना होते हुए जल मार्ग से निकलती है।
18 साल पहले शुरू हुई थी तिरंगा यात्रा
तिरंगा यात्रा में शामिल होने वाले सभी तैराक अपने एक हाथ में तिरंगा पकड़ते हैं और तैरते हुए लगभग 7 किलोमीटर लंबा सफर तय करते हैं। इस तिरंगा यात्रा की शुरुआत संजय यादव नाम के तैराक ने की थी। सबसे पहले उन्होंने ही 18 साल पहले इस तिरंगा यात्रा में अपने कुछ साथियों के साथ तैरना शुरू किया था। बीते दिनों उनका निधन हो गया। इसलिए इस साल उनकी याद में इस यात्रा का आयोजन किया गया।
14 अगस्त बरसात के सीजन का मध्य समय होता है। इस दौरान नर्मदा नदी का प्रवाह काफी तेज होता है। नर्मदा नदी में पानी की मात्रा भी ज्यादा होती है। ऐसी स्थिति में नदी में तैरना जानलेवा हो सकता है लेकिन देशभक्ति के जुनून में ये सब बड़ी आसानी से होता है।
जबलपुर का तैराकी मंडल है खास
जबलपुर के जिलहरी घाट में नित्य तैराकी मंडल है, जो पूरे साल जिलहरी घाट में तैरने वाले लोगों ने बनाया है। इसलिए इन लोगों को तैरने का अच्छा अनुभव है। इस वजह से ये आसानी से उफानती नदी में भी तैर लेते हैं। जबलपुर जिला तैराकी संघ के अध्यक्ष दीपक असरानीने बताया “वह हर साल इस यात्रा में शामिल हुए हैं। उनके साथ उनके एक बुजुर्ग मित्र जिनकी उम्र लगभग 60 साल है, वे इस साल भी इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं।