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एमपी में पंचायत-निकाय चुनाव 2027 की तैयारी शुरू, पहली बार पंच-सरपंच भी ईवीएम से चुनेंगे मतदाता

जनलोक टाईम्स से रामेश्वर प्रसाद त्रिपाठी

भोपाल- मध्य प्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां राज्य निर्वाचन आयोग ने तेज कर दी हैं। इस बार चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आयोग पंच और सरपंच पदों के चुनाव भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से कराने की तैयारी कर रहा है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो प्रदेश के इतिहास में पहली बार पंचायत और नगरीय निकायों के सभी चुनाव शत-प्रतिशत ईवीएम के माध्यम से संपन्न होंगे।

तैयारियों के तहत गुरुवार को राज्य निर्वाचन आयोग में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के 44 जिलों के डिप्टी इलेक्शन ऑफिसर एवं मास्टर ट्रेनर्स शामिल हुए। आयोग ने अधिकारियों को चुनाव संबंधी तकनीकी तैयारियों, प्रशिक्षण और ईवीएम संचालन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जून में निकाय, जुलाई में पंचायत चुनाव

राज्य निर्वाचन आयोग की योजना के अनुसार जून 2027 में प्रदेश के 413 नगरीय निकायों के चुनाव कराए जाएंगे। इसके लिए लगभग 22 हजार मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। इसके बाद जुलाई 2027 में करीब 23 हजार ग्राम पंचायतों के चुनाव होंगे, जिनके लिए 72 हजार मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

पहली बार पूरी चुनाव प्रक्रिया होगी ईवीएम आधारित

वर्ष 2022 के पंचायत चुनावों में जिला पंचायत और जनपद पंचायत सदस्यों के चुनाव ईवीएम से हुए थे, जबकि पंच और सरपंच पदों के लिए बैलेट पेपर का उपयोग किया गया था। इस बार आयोग पंच और सरपंच के चुनाव भी ईवीएम से कराने की तैयारी में है, जिससे मतगणना तेज होगी और परिणाम शीघ्र घोषित किए जा सकेंगे।

वेबकास्टिंग से होगी हर गतिविधि पर नजर

चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए इस बार बड़े पैमाने पर वेबकास्टिंग की जाएगी। आयोग का मानना है कि डिजिटल निगरानी से मतदान प्रक्रिया पर विश्वास और पारदर्शिता दोनों मजबूत होंगे। मध्य प्रदेश की ईवीएम अन्य राज्यों—त्रिपुरा, सिक्किम, महाराष्ट्र और राजस्थान—के स्थानीय निकाय चुनावों में भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मतदाताओं का भरोसा सर्वोपरि: राज्य निर्वाचन आयुक्त

राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्वाचन संबंधी सभी तकनीकी संशयों का समय पर समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों के चुनाव अत्यंत संवेदनशील होते हैं और उप जिला निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। नई तकनीकों को अपनाने के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि चुनाव प्रक्रिया और ईवीएम पर मतदाताओं का विश्वास पूरी तरह कायम रहे।

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