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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को पीएम मोदी ने दिखाई हरी झंडी, हरित परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम

जनलोक टाईम्स से रामेश्वर त्रिपाठी की रिपोर्ट

नईदिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जींद में शुक्रवार को भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस ट्रेन का किराया काफी सस्ता है। जींद-सोनीपत रूट पर ट्रेन कई रेलवे स्टेशनों पर रुकेगी और रोज़ाना लगभग 2,600 यात्री इसमें सफ़र कर सकेंगे। इसे देश में बनी हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके बनाया गया है और यह पारंपरिक ओवरहेड इलेक्ट्रिक तारों के बिना चलेगी।

ट्रेन का किराया कितना है?

नई शुरू हुई हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसका सस्ता किराया है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, किराया 5 रुपये से शुरू होता है और तय की गई दूरी के आधार पर ज़्यादा से ज़्यादा 25 रुपये तक हो सकता है। हाइड्रोजन ट्रेन यात्रियों को कम खर्च में यात्रा का विकल्प दे सकती है। शुरुआती किराया कई रेलवे स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत से भी कम है।

यह ट्रेन कौन सा रूट कवर करेगी?

10 कोच वाली यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच चलेगी और लगभग दो घंटे में करीब 90 किलोमीटर का सफ़र तय करेगी। इस रूट पर ट्रेन 11 जगहों पर रुकेगी और रोज़ाना लगभग 2,600 यात्री इसमें सफ़र कर सकेंगे।

हाइड्रोजन ट्रेन कैसे काम करती है?

हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी इस सिद्धांत पर काम करती है कि यह हाइड्रोजन से जुड़ी केमिकल रिएक्शन के ज़रिए बिजली बनाती है। खास बात यह है कि इससे बाय-प्रोडक्ट के तौर पर सिर्फ़ पानी की भाप निकलती है। यह इसे पारंपरिक रेल ट्रैक्शन सिस्टम का एक साफ़-सुथरा विकल्प बनाती है, जो फॉसिल फ्यूल पर निर्भर होते हैं। डीजल लोकोमोटिव के उलट, जो मैकेनिकल एनर्जी बनाने के लिए कंबशन (दहन) पर निर्भर होते हैं, हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन में प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर आधारित एक ऑनबोर्ड पावर प्लांट होता है।

ट्रेन पर लगे सिलेंडरों में जमा हाइड्रोजन, फ्यूल सेल के अंदर आस-पास की हवा से ली गई ऑक्सीजन के साथ रिएक्शन करके बिजली बनाती है। यह बिजली ट्रैक्शन मोटरों को चलाती है, जो बदले में पहियों को घुमाती हैं। इलेक्ट्रोकेमिकल प्रोसेस से सीधे बाय-प्रोडक्ट के तौर पर सिर्फ़ पानी की भाप और गर्मी निकलती है, जिससे कंबशन, धुआं और टेलपाइप से होने वाला कार्बन उत्सर्जन खत्म हो जाता है। ट्रेनसेट में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार और आठ ट्रेलर कोच होते हैं। हर ड्राइविंग पावर कार में हाइड्रोजन फ्यूल सेल, लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरी और हाइड्रोजन स्टोरेज सिलेंडर होते हैं। ये सब मिलकर ट्रैक्शन पावर देते हैं।

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