डिग्री वितरण और लंबित परीक्षाओं को लेकर छात्र संघ ने की कुलपति से मुलाकात, कर्मचारी संघ के समर्थन के बाद बढ़ा विवाद; विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
जबलपुर- रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय परिसर में छात्र हितों और कर्मचारी संघ की मांगों को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन उस समय विवाद में बदल गया, जब धरना स्थल पर कथित तौर पर छात्र प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के बीच हाथापाई हो गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर की व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश छात्र संघ के अध्यक्ष अभिषेक पांडेय अपने साथी छात्र अंकुर जैन और नमन शर्मा के साथ विश्वविद्यालय पहुंचे थे। छात्र प्रतिनिधियों ने कुलपति डॉ. राजेश शर्मा से मुलाकात कर डिग्री वितरण में हो रही देरी तथा लंबित परीक्षाओं का आयोजन जल्द कराने की मांग रखी। बताया गया कि इस दौरान कुलपति से सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा हुई और छात्रों ने अपनी समस्याएं रखीं।
कर्मचारी संघ के धरने को छात्रों ने दिया समर्थन
कुलपति से मुलाकात के बाद छात्र प्रतिनिधि प्रशासनिक भवन के समीप पहुंचे, जहां कर्मचारी संघ अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठा था। कर्मचारियों द्वारा समर्थन मांगे जाने पर छात्र संघ ने उनके आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा कर दी। इसके बाद परिसर का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।
धरना स्थल पर गाली-गलौज और मारपीट का आरोप
आरोप है कि इसके बाद कुछ कर्मचारी धरना स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते कहासुनी गाली-गलौज और फिर कथित मारपीट में बदल गई। घटना में लात-घूंसे चलने की बात सामने आई है। वायरल वीडियो में भी कुछ लोगों के बीच हाथापाई होती दिखाई दे रही है।
छात्र प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि विवाद को बढ़ावा देने में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका रही। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
वीडियो सामने आने के बाद कार्रवाई की मांग
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में रोष का माहौल है। छात्र संगठन और कर्मचारी पक्ष से जुड़े लोगों द्वारा पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।
छात्रों का कहना है कि डिग्री वितरण और लंबित परीक्षाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत के बजाय विवाद और मारपीट की स्थिति बनना दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं, पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष और घटना के बाद की कार्रवाई स्पष्ट होने के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।