मध्यप्रदेश

ग्राम पंचायत घुघरा में तालाब निर्माण में लाखों का झोल जनपद सदस्य ने कलेक्टर से की उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग

जनलोक टाईम्स से सोनू त्रिपाठी की रिपोर्ट

कटनी/ढीमरखेड़ा- जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत घुघरा में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम पंचायत में तालाब निर्माण के नाम पर स्वीकृत लाखों रुपये की सरकारी राशि के गबन और भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप सामने आया है। इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण अब लामबंद होने लगे हैं।मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के वार्ड क्रमांक-15 से जनपद सदस्य महेन्द्र कोरी ने सिलौड़ी में आयोजित जनसुनवाई के दौरान कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी को एक लिखित ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने निर्माण कार्य में हुई वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने और मामले में संलिप्त दोषियों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की पुरजोर मांग की है।

15 लाख रुपये स्वीकृत, लेकिन धरातल पर तालाब का वजूद नहीं

जनपद सदस्य महेन्द्र कोरी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, ग्राम पंचायत घुघरा में ग्रामीणों की सुविधा और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 15 वें वित्त आयोग की मद से एक तालाब का निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया था। वित्तीय वर्ष 2023–24 के दौरान उक्त तालाब निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर पंचायत के खाते में जारी की गई थी। इसके पश्चात कार्य को पूरा करने के नाम पर वित्तीय वर्ष 2025–26 में 5 लाख रुपये की राशि और स्वीकृत की गई। इस प्रकार, तालाब निर्माण के लिए शासन की ओर से कुल मिलाकर 15 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट जारी किया जा चुका है। लेकिन आरोप है कि इतनी बड़ी रकम जारी होने के बावजूद धरातल पर तालाब का निर्माण कार्य नाममात्र का ही हुआ है या पूरी तरह अधूरा पड़ा है।कागजों में भले ही निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया हो, लेकिन वास्तव में ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।

मिलीभगत से ‘बंदरबांट’ करने का गंभीर आरोप

जनपद सदस्य महेन्द्र कोरी ने अपनी शिकायत में खुले तौर पर आरोप लगाया है कि इस पूरे वित्तीय खेल में ग्राम पंचायत के जिम्मेदार पदधिकारियों और प्रशासनिक अमले की पूरी तरह से मिलीभगत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरपंच, ग्राम पंचायत सचिव और उपयंत्री की आपसी सांठगांठ से बिना नियमानुसार पूरा काम कराए ही स्वीकृत राशि का आहरण (विड्रॉल) कर लिया गया। जनता के विकास और जल संरक्षण के लिए आई 15 लाख रुपये की राशि का आपस में बंदरबांट कर लिया गया। निर्माण कार्य के मूल्यांकन और भौतिक सत्यापन में भी तकनीकी अधिकारियों द्वारा भारी लापरवाही या फर्जीवाड़ा किया गया, जिसके कारण बिना काम पूरा हुए भुगतान संभव हो सका।

जल संकट और ग्रामीणों में गहरा आक्रोश

ग्राम पंचायत घुघरा और आसपास के क्षेत्रों में भीषण गर्मी के दिनों में पेयजल और निस्तार के पानी की भारी समस्या बनी रहती है। जल स्तर को सुधारने और मवेशियों व ग्रामीणों के उपयोग के लिए ऐसे तालाब संजीवनी का काम करते हैं।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकार की ओर से लाखों रुपये की योजनाएं मंजूर की जाती हैं, तब उम्मीद जगती है कि अब गांव की पानी की समस्या दूर होगी।लेकिन जब पंचायत के जिम्मेदार प्रतिनिधि और अधिकारी ही इस बजट की हेराफेरी कर लें, तो विकास की उम्मीदें धराशायी हो जाती हैं। निर्माण कार्य पूरा न होने से जहां एक ओर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को जल संकट से कोई राहत नहीं मिल सकी है।

सिलौड़ी जनसुनवाई में गूंजा मुद्दा कलेक्टर से सख्त एक्शन की आस

सिलौड़ी में आयोजित जनसुनवाई के दौरान जनपद सदस्य महेन्द्र कोरी ने कलेक्टर आशीष तिवारी के समक्ष इस पूरे मामले को प्रमुखता से रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार के कारण आम जनता का सरकारी तंत्र और योजनाओं से भरोसा उठ रहा है। जिला स्तर की एक निष्पक्ष जांच समिति या तकनीकी विशेषज्ञों की टीम गठित कर घुघरा में तालाब निर्माण कार्य की भौतिक स्थिति की जांच कराई जाए। 15वें वित्त आयोग से आहरित की गई 15 लाख रुपये की राशि के एक-एक रुपये का लेखा-जोखा और वाउचर जांचे जाएं। दोषी पाए जाने वाले सरपंच, सचिव और उपयंत्री के खिलाफ गबन का मामला दर्ज किया जाए, शासकीय राशि की रिकवरी (वसूली) की जाए और उन्हें पद से पृथक करने की दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

कलेक्टर ने दिया जांच का आश्वासन

जनसुनवाई के दौरान ज्ञापन स्वीकार करते हुए कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी ने मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने जनपद सदस्य को आश्वस्त किया है कि शासकीय राशि के दुरुपयोग और विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की जांच संबंधित विभागीय अधिकारियों को सौंपी जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष व वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

सुशासन पर सवालिया निशान

ग्राम पंचायत घुघरा का यह मामला कोई पहला मामला नहीं है, जब किसी पंचायत में 15वें वित्त आयोग या विकास योजनाओं के पैसों में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई हों। लेकिन 15 लाख रुपये जैसी बड़ी राशि आहरित हो जाने के बाद भी काम न होना प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत के बाद कितनी तत्परता से जांच करता है और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाता है, ताकि भविष्य में इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं पर लगाम कसी जा सके।

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