भोपाल- असफलता से निराश होकर हार मान लेने वाले युवाओं के लिए मध्य प्रदेश की आस्था दमेले की कहानी किसी प्रेरणादायक मिसाल से कम नहीं है। जीवन में कठिन परिस्थितियों और लगातार असफलताओं के बावजूद आस्था ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और अंततः अपनी मेहनत के दम पर बड़ी सफलता हासिल की।
आस्था दमेले ने महज सातवीं कक्षा में घर छोड़ने जैसा कठिन फैसला लिया। इसके बाद सफलता की राह में उन्हें एक-दो नहीं, बल्कि 14 प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता का सामना करना पड़ा। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। हर परीक्षा से सीख ली, अपनी कमियों को पहचाना और पूरी मेहनत व आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती रहीं।
आस्था ने कई राज्यों की प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लिया। लंबे संघर्ष और अथक परिश्रम के बाद उन्हें बड़ी सफलता तब मिली, जब उन्होंने BPSC 70वीं परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 23 हासिल की।
आज आस्था दमेले बिहार में SDM के पद पर सेवाएं दे रही हैं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। उनका सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो एक-दो असफलताओं के बाद अपने सपनों को छोड़ देते हैं।
आस्था की कहानी यह संदेश देती है कि असफलता मंजिल का अंत नहीं, बल्कि सफलता की राह में मिलने वाला एक पड़ाव है। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत लगातार जारी रहे और आत्मविश्वास कायम रहे, तो कठिन से कठिन मंजिल भी हासिल की जा सकती है।